

हरिद्वार :: शिवरात्रि के पावन अवसर पर धर्मनगरी हरिद्वार में एक अनोखी कांवड़ यात्रा देखने को मिली। अखंड परशुराम अखाड़े के तत्वावधान में यूजीसी (यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन) के नियमों/कानूनों के विरोध में यह कांवड़ यात्रा निकाली गई। यह यात्रा हरिद्वार के बिरला घाट से शुरू होकर रेलवे स्टेशन स्थित शिवमूर्ति तक पहुँची। इस दौरान भगवान परशुराम का रूप धारण किए संत कार्तिकेय महाराज ने अपने कांवड़ को कंधों पर उठाया।
मीडिया से बातचीत करते हुए भगवान परशुराम का रूप धरे संत कार्तिकेय महाराज ने सरकार की नीतियों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संत का कार्य समाज में अच्छे और बुरे की पहचान करना है। सरकार की नीतियां चारों वर्णों को आपस में लड़ाने का काम कर रही हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “हम भगवान शिव से जल अभिषेक कर प्रार्थना कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सद्बुद्धि मिले ताकि वे ऐसे काले कानून न लाएं। अगर सरकार ऐसे निर्णय लेती रही तो सवर्ण समाज और संन्यासी सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे।
वहीं प्रदर्शन में अखण्ड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने भी यूजीसी रोलबैक की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा लागू किए गए इस कानून से हमारे बच्चों के भविष्य पर संकट मंडरा रहा है। यह कानून सवर्ण समाज के हितों के खिलाफ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस निर्णय को वापस नहीं लिया या आरक्षण नीतियों में सुधार नहीं किया, तो सवर्ण समाज आंदोलन को और तीव्र करेगा।
कांवड़ यात्रा के दौरान प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की और “यूजीसी रोलबैक” तथा “काला कानून वापस लो” के नारे लगाए।




