

22 फरवरी को हरिद्वार पहुंचेगा अखाड़े का पंच परमेश्वर, 25 फरवरी को होगा धर्मध्वजा आरोहण और 28 फरवरी को निकलेगी संतों की शोभायात्रा
हरिद्वार(विकास चौहान )। हरिद्वार में आयोजित होने वाले कुंभ मेला 2027 को लेकर तैयारियां धीरे-धीरे गति पकड़ने लगी हैं। प्रदेश सरकार और कुंभ मेला प्रशासन के साथ-साथ अब विभिन्न अखाड़ों ने भी अपने धार्मिक कार्यक्रमों और आयोजन की रूपरेखा सार्वजनिक करनी शुरू कर दी है। इसी क्रम में पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी ने कुंभ पर्व 2027 के लिए अपने प्रमुख कार्यक्रमों और तीनों अमृत स्नान की तिथियों की घोषणा कर दी है। अखाड़े की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार फरवरी 2027 में पंच परमेश्वर के नगर प्रवेश से धार्मिक आयोजनों की शुरुआत होगी। इसके बाद धर्मध्वजा आरोहण, संतों की शोभायात्रा और छावनी प्रवेश जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
अखाड़े के मेला अध्यक्ष एवं रमता पंच श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि कुंभ पर्व के अंतर्गत सभी प्रमुख धार्मिक परंपराओं और आयोजनों को निर्धारित तिथियों के अनुसार संपन्न कराया जाएगा। अखाड़े की ओर से जारी कार्यक्रम में 22 फरवरी को पंच परमेश्वर का नगर प्रवेश, 25 फरवरी को धर्मध्वजा आरोहण तथा 28 फरवरी को संतों की शोभायात्रा और छावनी प्रवेश का उल्लेख किया गया है।

22 फरवरी को होगा पंच परमेश्वर का नगर प्रवेश
पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के कार्यक्रम के अनुसार सोमवार, 22 फरवरी 2027 को विभिन्न स्थानों से आने वाले अखाड़े के पंच परमेश्वर हरिद्वार में नगर प्रवेश करेंगे। इसके बाद वे गोविंदपुरी स्थित एसएमजेएन (पीजी) कॉलेज पहुंचेंगे। कुंभ पर्व के दौरान अखाड़ों के पंच परमेश्वर का नगर प्रवेश धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस आयोजन के साथ अखाड़े की कुंभ संबंधी गतिविधियों को औपचारिक रूप से गति मिलेगी।
25 फरवरी को फहराई जाएगी धर्मध्वजा
अखाड़े की ओर से जारी कार्यक्रम के मुताबिक, बृहस्पतिवार, 25 फरवरी 2027 को फाल्गुन कृष्ण पंचमी के अवसर पर धर्मध्वजा आरोहण किया जाएगा। सनातन परंपरा में अखाड़ों की धर्मध्वजा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। धर्मध्वजा आरोहण के साथ अखाड़े के धार्मिक आयोजनों में महत्वपूर्ण चरण पूरा होगा। इस कार्यक्रम में अखाड़े के संत-महात्माओं और अन्य संबंधित लोगों की सहभागिता रहने की उम्मीद है।
28 फरवरी को निकलेगी संतों की शोभायात्रा
धर्मध्वजा आरोहण के बाद रविवार, 28 फरवरी 2027 को अखाड़े के संतों की शोभायात्रा निकाली जाएगी। कार्यक्रम के अनुसार शोभायात्रा गोविंदपुरी स्थित एसएमजेएन (पीजी) कॉलेज से प्रारंभ होकर पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी की छावनी तक पहुंचेगी। यहां संतों का छावनी प्रवेश संपन्न होगा।
कुंभ पर्व के दौरान अखाड़ों की शोभायात्राएं श्रद्धालुओं और साधु-संतों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहती हैं। इन आयोजनों में अखाड़ों की धार्मिक परंपराओं, साधु-संतों की उपस्थिति और सनातन संस्कृति की झलक देखने को मिलती है।
कुंभ 2027 के तीनों अमृत स्नान की तिथियां घोषित
पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी ने कुंभ पर्व 2027 के लिए तीन प्रमुख अमृत स्नान की तिथियां भी घोषित की हैं। अखाड़े की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार ये स्नान मार्च और अप्रैल 2027 में आयोजित होंगे।
अमृत स्नान की घोषित तिथियां इस प्रकार हैं:
6 मार्च 2027, शनिवार: महाशिवरात्रि के अवसर पर प्रथम अमृत स्नान। कार्यक्रम में इसे फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी (चतुर्दशी) से संबंधित बताया गया है।
6 अप्रैल 2027, मंगलवार: चैत्र अमावस्या के अवसर पर द्वितीय अमृत स्नान।
14 अप्रैल 2027, बुधवार: मेष संक्रांति के अवसर पर तृतीय अमृत स्नान। अखाड़े के कार्यक्रम में इसे चैत्र शुक्ल अष्टमी के साथ उल्लेखित किया गया है।
इन तिथियों के साथ अखाड़े ने अपने प्रमुख धार्मिक आयोजनों की प्रारंभिक रूपरेखा सामने रख दी है। अमृत स्नान कुंभ पर्व के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजनों में शामिल होते हैं, जिनमें साधु-संतों और श्रद्धालुओं की भागीदारी रहती है।
कुंभ की तैयारियों को मिलेगी गति
हरिद्वार में कुंभ मेला 2027 को लेकर प्रशासनिक और धार्मिक स्तर पर तैयारियां महत्वपूर्ण दौर में प्रवेश कर रही हैं। अखाड़ों की ओर से कार्यक्रमों की घोषणा होने से आयोजन की रूपरेखा स्पष्ट होने लगी है। पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के कार्यक्रम के अनुसार फरवरी के अंतिम सप्ताह से धार्मिक आयोजनों की शुरुआत होगी, जबकि मार्च और अप्रैल में तीन अमृत स्नान संपन्न होंगे।
कुंभ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं की सुविधा, यातायात प्रबंधन, सुरक्षा, स्वच्छता और संतों के आवागमन की व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण रहती हैं। ऐसे में अखाड़ों के कार्यक्रम सामने आने के साथ ही संबंधित व्यवस्थाओं की योजना बनाने में भी मदद मिलेगी।
पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी की ओर से घोषित कार्यक्रम के बाद अब कुंभ पर्व 2027 को लेकर अन्य अखाड़ों और प्रशासन की आगामी घोषणाओं पर भी नजर रहेगी।




